राग मधुवंती

तोडी थाट के राग मधुवंती को सबसे मधुर रागों में से शुमार किया जाता है। राग में विरह की वेदना तथा मिलन की आस दोनों तरह की भावना प्रधान होती है। इस राग को दिन के तृतीय प्रहार में गाया और बजाय जाता है । यह एक औडव सम्पूर्ण ज़ाति कर राग है ।
राग की सरंचना इस प्रकार है

आरोह :: नि - सा- - ग - म - प - नि - सा
अवरोह :: सा - नि - ध - प - म - ग - रे - सा
वादी स्वर : प्
संवादी स्वर : सा
पकड़ : ध - (प)मा - प - ग - म - ग - रे - सा

इस राग पर आधारित एक बहुत ही खूबसूरत गीत है लता जी कर गाया हुआ -रस्में उल्फत को निभाए तो निभाए कैसे। इसे आप यहाँ सुन सकते है :

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इसके आलावा अगर आपको शास्त्रीय रचना सुन नि है तो यह है पण्डित जसराज , राग मधुवंती लेकर।


2 comments:

Manoshi

सचमुच बहुत मधुर राग है, मुल्तानी के क़रीब- आपका प्रयास भी सराहनीय है मगर

आप जब टाइप करते हैं तो कोमल और तीव्र स्वर समझ नहीं आते। मंद्र सप्तक या तार भी नहीं। इससे राग का स्वरूप बिगड़ जाता है।

ऩि सा ग॒ म॑ प नि सां

ऐसे टाइप करें (अगर बरहा इस्तेमाल कर रहे हैं तो)

nxi saa ga@ ma# pa ni saaM

D.K.M.

I have heard that some people, especially in eastern India call this raga by the name Ambika. For emotional reasons, I prefer Ambika as it invokes more Bhaava-s than the admittedly beautiful word Madhuvanti.

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