राग भूपाली

राग भोपाली एक कल्याण थाट का तथा औडव जाती का राग होता है। इसमें म और नि स्वर वर्जित होते है। वादी स्वर गा होता है और संवादी ध होता है। इसको रात्रि के प्रथम प्रहर में गाया और बजाया जाता है।

इस राग का चलन मुख्यत: मन्द्र और मध्य सप्तक के प्रतह्म हिस्से में होती है (पूर्वांग प्रधान राग)। इस राग में ठुमरी नहीं गायी जाती मगर, बड़ा खयाल, छोटा खयाल, तराना आदि गाया जाता है। कर्नाटक संगीत में इसे मोहन राग कहते हैं।

आरोह- सा, रे, ग, प, ध, सा।

अवरोह- सां, ध, प, ग, रे, सा।

पकड़- प ग, रे ग, सा रे, ध़ सा।

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का बांसुरी वादन आप यहाँ सुन सकते है।


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