ये जोबन अंजुरी का पानी - राग गुजरी तोडी

तोडी ठाट का राग गुजरी तोडी एक अत्यन्त मधुर राग है । इसको दिन के दूसरे प्रहार में गाया और बजाय जाता है। इसमें वादी स्वर ध और संवादी रे होता है।

आरोह
स - र - ग - म - ध - न - स'

अवरोह
स' - न - ध - म - ग - र - स्

पकड़
म - ध - न - ध - म - ग - र - ग - र - स्

चलो सखी सोतन के घर जाहिए।

मान घटे तो क्या घाट जाहिए, पी के दर्शन पहिये ,

यह जोबन अंजुरी को पानी

समय गयो पछ्ताहियें

आप सुनिए अच्छा लगेगा। .....................

ye joban anjuri ko paani, samay gayo pachtaihein - This youth is like water resting in a palm it will drip away with time and at the end one will wonder why did I while away my time during my youth

4 comments:

Udan Tashtari

अच्छा लगा पढ़ कर.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

सुमधुर सँगीत
पँडित जी को सुनना
सदा ही सुखद रहता है ~
धन्यवाद !

संजय पटेल

भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनूठी सेवा कर रहा है आपका ब्लॉग.आपका ये कारनामा बेसुरी हो रही दुनिया को रहने लायक़ बना देगा, इसमें शक नहीं.
बार बार आता रहूँगा स्वर-गंगा के किनारे.

Suresh Soni

aap sabhi ka dhanywad ........hum to chahte hai ki har AAM aadmi samjhe hamari apni virasat ko.

Blogger template 'BrownGuitar' by Ourblogtemplates.com 2008