राग बसंत --काहे छेड़े छेड़े मोहे देवदास

राग बसंत की ये खास बात होती है साथियों, कि आपका मूड कितना ही ख़राब हो , अगर अच्छी सी रचना सी सुन ली तो मूड बदल जाएगा। उल्लास , उमंग , अल्हड़ता इसके प्रधान गुन है। । अगर इस राग को रागों का राजकुमार इसे कहूँ तो उचित ही होगा।

राग बसंत पर आधारित हिन्दी फिल्मों में कई गाने है। सबसे ज्यादा उदहारण जिसका दिया जाता है वो बड़े गुलाम अली खान का गाया 'केतकी , गुलाब फूल , चम्पक बन फूले' है ।

एक गाना जो इसी राग पर आधारित है और एक दम नई फ़िल्म में है वोः है काहे छेड़े छेड़े मोहे गर्व लगा के ।

देवदास फ़िल्म में इस्माइल दरबार ने बहुत ही खूबसूरत संगीत रचा है। आप सुनिए और देखिये भी।

3 comments:

Udan Tashtari

सुना हुआ है..देखा भी है..फिर भी पुनः बहुत मजा आया, आभार.

अल्पना वर्मा

is geet ko kavita ji ki awaaz ne aur madhur aur karn priy bana diya hai.sundar geet ke liye dhnywaad.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

Sunder Geet sunvane ka shukriya -

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