गोविन्द दामोदर माधवेति

कस्तुरी तिलकम तो आपको निश्चित ही अच्छा लगा होगा । उस से बढ़ कर है यह रचना 'गोविन्द दामोदर मध्वेती " । जिन लोगों को भारतीय शास्त्रीय संगीत समझ में नही आता या अटपटा लगता है इस को एक बार सुन लें । जिज्ञासा बढ़ जायेगी। और अंतर्मन और संगीएत मांगने लगेगा। ऐसा मेरा विश्वास है । वैसे पण्डित जसराज और पण्डित भीमसेन जोशी भारतीय संगीत के स्तम्भ कहे तो अतिशयोक्ति नही होगी।

2 comments:

Udan Tashtari

बहुत आभार!!

"अर्श"

bahot badhiya ,bahot khub ,,sundar ..


aapko dhero sadhuwad..


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