राग बागेश्री

राग बागेश्री काफ़ी थाट का संपूर्ण जाती का राग है । इसे गाने बजाने का सबसे उचित समय रात्रि का तीसरा प्रहार होता है।



वादी स्वर - म (मध्यम )
संवादी स्वर- सा (षडाज)
आरोह - सा नि़॒ ध नि़॒ सा, म ग॒ म, ध नि॒ सां ।
अवरोह - सां नि॒ ध , म, ग॒ म ग॒ रे सा ।
पकड़ - सा नि़॒ ध, सा म ध नि़॒ ध म ग॒ रे सा (this indicates that it is a lower octave (mandr saptak)


जग दर्द-ऐ-इश्क जाग : अनारकली
राधा न बोले न बोले : आजाद
बेदर्दी दगाबाज़ जा तू नहीं : ब्लफ मास्टर
चाह बर्बाद करेगी : शाह जहाँ
जाओ जाओ नन्द के लाला : रंगोली
आजा रे, परदेसी : मधुमती
घड़ी घड़ी मेरा दिल धडके : मधुमती
हमसे आया न गया : देख कबीर रोया
पूछता जा मेरे मरघट से : ग़ज़ल गुलाम अली
चमन में रंग-ऐ-बहार : ग़ज़ल गुलाम अली

1 comments:

Udan Tashtari

आभार जानकारी का. बहुत उम्दा प्रस्तुति.

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