देर से मिला पर मिला सही : पण्डित भीमसेन जोशी को भारत रत्न

संगीत शिरोमणि पण्डित भीमसेन जोशी को भारत रत्न दिया गया है। ऐसी शख्शियत जिनका कद दुनिया के किसी भी पुरस्कार से बड़ा हो गया है , हालांके मायने नही रखता, फ़िर भी हम जैसे उनके भक्तों के लिए ये खुशी की बात है।
किराना घराने के शास्त्रीय गायक 86 वर्षीय पंडित भीमसेन जोशी को मंगलवार को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने का फैसला किया गया।
19 फरवरी 1922 को कर्नाटक के गड़ग में जन्मे जोशी को हिंदुस्तानी खयाल गायकी और भजनों के लिए जाना जाता रहा है। दूरदर्शन पर 1988 में ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के जरिये उनकी आवाज की खनक पूरे देश के घर-घर में पहुंच गई थी।
पं। जोशी ने खयाल गायकी का पाठ सवाई गंधर्व से सीखा जो खयाल गायकी के जनक अब्दुल करीम खान के शिष्य थे। 11 बरस की उम्र से संगीत साधना में जुटे भीमसेन ने ग्वालियर, लखनऊ, रामपुर में रहकर गायकी को जिंदगी बना डाला।
बचपन में संगीत सिखने के लिए रोजाना १० किलोमीटर पैदल चलने वाले और फ़िर घर से भाग कर अपने आप को संगीत के लिए समर्पित करने वाले पंडित जी को हमारा कोटि कोटि नमन एवं बधाईयाँ।



2 comments:

दिवाकर प्रताप सिंह

अपने आप को संगीत के लिए समर्पित करने वाले पंडित भीमसेन जी जोशी को हमारा कोटि-कोटि नमन एवं बधाईयाँ।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

आज ही आपका ब्लोग देखा और बहुत पसँद आया -
आपको पँडितजी से मिलने का वाकया सुनाऊँ ?
बहुत सुँदर पोस्ट लिखी है आपने पँडित भीमसेन जोशी जी पर -
वाकई वे विश्वरत्न हैँ -सँगीत ईश्वर की आराधना है -ऐसा समर्पण ही उन्हेँ परमात्मा से
जोडे रखता है - मेरी भेँट "राम श्याम गुण गान " की सी.डी. रीलीज़ के समय उनसे हुई थी
पापाजी ने गीत रचे और लतादी व पँडितजी ने उन्हेँ गाया था - उसी केसेट से "सुमति सीता राम " "बाजे रे मुरलिया बाजे "
"राम का गुणगान करीये " उनके सिँह घोष से स्वरोँ मेँ सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है :-)
- लावण्या

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